रोज़ करोड़ों लोग सोशल मीडिया पर अपनी ज़िंदगी शेयर करते हैं — लेकिन हर पोस्ट, फोटो और प्रोफ़ाइल की जानकारी गलत हाथों में पड़कर आपके खिलाफ़ इस्तेमाल हो सकती है। इस गाइड में पाँच ज़रूरी बातें हैं: प्राइवेसी सेटिंग्स, क्या कभी शेयर न करें, नकली प्रोफ़ाइल और स्कैम की पहचान, साइबरबुलिंग से निपटना, और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा।

सबसे पहले प्राइवेसी सेटिंग्स ठीक करें

ज़्यादातर ऐप्स डिफ़ॉल्ट रूप से प्रोफ़ाइल पब्लिक रखते हैं, क्योंकि इससे उन्हें फायदा होता है — आपकी सुरक्षा के लिए नहीं। हर ऐप की सेटिंग्स में जाएं और अकाउंट को प्राइवेट या "सिर्फ़ दोस्तों के लिए" कर दें, ताकि अनजान लोग आपकी पोस्ट, फोटो या फ्रेंड लिस्ट न देख सकें। हर कुछ महीनों में इन्हें दोबारा जांचें, क्योंकि अपडेट के बाद सेटिंग्स अक्सर रीसेट हो जाती हैं।

पोस्ट करने से पहले सोचें: क्या कभी न शेयर करें

एक अच्छा नियम: वह कुछ भी पोस्ट न करें जो आप गली में किसी अजनबी को न दिखाएं — न घर का पता, न गाड़ी का नंबर प्लेट, न पहचान-पत्र, बोर्डिंग पास या बच्चों के स्कूल की यूनिफ़ॉर्म। पूरी जन्मतिथि, फोन नंबर और कार्यस्थल भी ठगों की मदद करते हैं, इसलिए इन्हें पब्लिक प्रोफ़ाइल पर न रखें।

नकली प्रोफ़ाइल और स्कैम पहचानें

ठग अब AI से बनी फोटो और असली जैसी क्लोन प्रोफ़ाइल इस्तेमाल करते हैं। चेतावनी के संकेत पहचानें: कम पोस्ट वाली प्रोफ़ाइलें जो सैकड़ों फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजती हैं, अनजानों के तेज़ी से बढ़ते रोमांटिक मैसेज, पक्के मुनाफ़े के "निवेश" वादे, और पैसे या गिफ़्ट कार्ड की ज़रूरी मांग। शक हो तो रुकें, दूसरे माध्यम से पुष्टि करें, और अकाउंट की रिपोर्ट करें।

साइबरबुलिंग से समझदारी से निपटें

अगर कोई परेशान कर रहा है, तो गुस्से में जवाब न दें — पहले सब कुछ का स्क्रीनशॉट लें। सबूत ही प्लेटफ़ॉर्म पर रिपोर्ट और ज़रूरत पड़ने पर पुलिस शिकायत को असरदार बनाता है। फिर अकाउंट ब्लॉक करें, रिपोर्ट करें, और किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बताएं। ज़्यादातर प्लेटफ़ॉर्म अब रिपोर्ट कुछ घंटों में जांचते हैं। निशाना बनना कभी आपकी गलती नहीं, और मदद मांगना सबसे मज़बूत कदम है।

बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रखें

बच्चों को सिर्फ़ पाबंदियों से ज़्यादा मार्गदर्शन चाहिए। आपका बच्चा जो भी ऐप इस्तेमाल करता है, उन सब में पैरेंटल कंट्रोल चालू करें, अकाउंट प्राइवेट रखें, और लोकेशन शेयरिंग व अनजानों की फ्रेंड रिक्वेस्ट बंद करें। लेकिन सबसे ज़रूरी है नियमित बातचीत: मिलकर सरल नियम तय करें — अनजानों से बात न करना, निजी फोटो न शेयर करना, और "अगर कुछ अजीब लगे तो पहले मुझे बताना।" जो बच्चे माता-पिता से खुलकर बात करते हैं, वे समस्याएं जल्दी बताते हैं, और जल्दी बताना ही छोटी समस्या को बड़ी होने से रोकता है।